To The Point Shaad

डबवाली क्षेत्र की कला व शिक्षा संस्थाओं के संरक्षक थे स्व. प्रिंसिपल आत्मा राम अरोड़ा

आदरणीय स्व. आत्माराम जी अरोड़ा अपनी कर्मभूमि किलियांवाली-डबवाली में आयोजित प्रत्येक कार्यक्रम में आमंत्रित फ्रंटलाइन वी वीआईपी थे। उनके किसी कार्यक्रम में उपस्थित होने भर से ही कार्यक्रम का स्तर भव्य हो जाता था। उनका किसी भी कार्यक्रम में आना न केवल आमंत्रित करने वाले की प्रतिष्ठा-शोभा को बढ़ाता था बल्कि स्वर्गीय अरोड़ा ही अपने से प्यार करने वालों से घिरे रहने के कारण कार्यक्रम का स्वत: ही केंद्रीय बिंदु बन जाते थे। यह उनका हरएक के प्रति अपनापन व स्नेहभाव ही था कि हर कोई उन्हें देखकर चुंबक की तरह उनकी तरफ खिंचता जाता और उन्हें चरण स्पर्श किए और मिले बिना नहीं रह पाता था। शहर की नामचीन हस्तियां भी उनसे मिलने को उत्सुक रहती एवं उन के सानिध्य में गरिमामयी महसूस करती थीं। आगामी भविष्य में इस क्षेत्र में आयोजित किसी भी कार्यक्रम में उनका उपस्थित न होना अब हरेक को खलेगा अवश्य ।

श्री अरोड़ा का जन्म 16 सितंबर 1942 में हरियाणा के सिरसा शहर में पिता श्री राम चंद और माता श्रीमती भागवंती देवी के घर हुआ। उन्हें ‘आत्माराम’ नाम साहिब श्री शाह मस्ताना बलोचिस्तानी द्वारा दिया गया क्योंकि वह और उनका परिवार शुरू से ही उनसे जुड़े हुए थे ।अपने छः बहन भाइयों में वे तीसरे नंबर पर थे । छोटी आयु में ही माता – पिता की मृत्यु एवं घोर आर्थिक तंगी से जूझते हुए मेहनती श्री आत्माराम ने दुकान का काम करते-करते नेशनल कॉलेज सिरसा से अपनी पढ़ाई की और अपनी कुशाग्र बुद्धि से पढ़ाई में बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हुए वे डिक्लेमेशन- डिबेट, कॉलेज मैगजीन के लिए लेखनी व अपने कॉलेज की थिंकर सोसायटी के सदस्य रहते हुए वे हर अध्यापक की आंखों के तारे बन गए ।तत्पश्चात कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ऐम.ए. करने के पश्चात उन्हें 1967 में मलोट डीएवी कॉलेज और गुरु नानक कॉलेज किलियांवाली दोनों जगह से अध्यापन की जॉब के लिए ऑफर आए परंतु मलोट में अपनी बहन शादीशुदा होने के कारण एवं सिरसा से किलियांवाली अधिक नजदीक होने के कारण उन्होंने गुरु नानक कॉलेज किलियांवाली की धरती को अपनी कर्मभूमि चुना एवं लगभग साढ़े तीन दशक उन्होंने इस संस्था को अपने बेहतरीन अध्यापन और बाद में 1992 मे प्रिंसिपल बनकर कुशल प्रबंधन की सेवाएं दीं। यहीं उनकी शादी चंडीगढ़ में बसे एक भद्र धवन परिवार की बेटी बैंक में कार्यरत बिमल देवी से हुई । अपनी सर्विस के दौरान वे एनएसएस इंचार्ज, कल्चरल कमेटी अध्यक्ष,क्रिकेट एसोसिएशन अध्यक्ष आदि पदों को भी सुशोभित करते रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र की सभी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं के निर्माण व सलाह -निर्देशन में अहम भूमिका निभाई । 30 सितंबर, 2002 में वह प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त होकर बाल मंदिर स्कूल और उसके बाद एचपीएस शेरगढ़ जैसी संस्थाओं को संभालने लगे ।साथ ही उन्होंने 1996 में अपनी दिवंगत पत्नी के नाम पर खोले विमल ज्योति इंस्टीट्यूट में विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ाना शुरू किया और कई शोधार्थियों को तो पीएचडी करवाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई । हालांकि अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात उनके घरवाले चाहते थे कि वह सिरसा वापस आए परंतु इस क्षेत्र के लोगों के प्यार और मधुर संबंधों के चलते श्री अरोड़ा ने बाल मंदिर रोड पर एक निवास स्थान लेकर यहीं अपनी कर्मभूमि में रहने का फैसला किया ।

क्षेत्र का जो भी शख्स उनके संपर्क में आया, उनका अपनेपन और वाक -कला का कायल बनकर रह गया ।शहर का कोई भी सामाजिक,सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम ऐसा नहीं था जहां उन्हें मुख्य अतिथि या विशिष्ट अतिथि के तौर पर आदर भाव से आमंत्रित न किया गया हो,यह लोगों का उनके प्रति मोह और श्रद्धा- भाव दर्शाता है ।

हालांकि अपने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से भी वे कई वर्षों से जूझ रहे थे परंतु उन्होंने कभी अपना आत्मबल कम नहीं होने दिया । जिससे भी वे मिलते, वह उनका कुशलक्षेम पूछता तो वह हंसते हुए जवाब देते मैं तो मालिक की रजा में राजी हूं ।पिछले वर्ष कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन से पहले उन्हें उनके भतीजे श्री निशांत अरोड़ा सिरसा स्थित अपने निवास स्थान पर ले गए तांकि वे अपने परिवार में स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें। वहां रहते हुए भी समाचार पत्र पढ़ने, रेडियो सुनने और ताश-क्रिकेट खेलने के शौकीन श्री अरोड़ा फेसबुक व्हाट्सएप के जरिए डबवाली और अपने चहेतों से जुड़े रहे और बीच-बीच में यहां आकर कई कार्यक्रमों में शिरकत करते रहे एवं सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष की अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते रहे । फरवरी 2021 में डबवाली में खुले नए बैंक आईडीएफसी के आमंत्रण पर वे विशेष तौर पर सिरसा से यहां पधारे और यही उनकी अपनी कर्मभूमि में अंतिम यात्रा रही ।

श्री अरोड़ा के परिवार और उनसे जुड़े लोगों व अपनी खुद की स्वर्गीय अरोड़ा साहब से होती रही बातचीत के आधार पर यह जानकारी देते हुए राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अमित बहल ने थिंकर सोसाइटी के विद्यार्थियों को बताया कि जिस तरह शहर की नामी-गिरामी समाजसेवी संस्था वर्चुअस क्लब को यह नाम श्री अरोड़ा ने दिया था उसी तरह थिंकर सोसाइटी का नामकरण भी उन्होंने ही किया एवं इसके सर्वप्रथम वार्षिक कार्यक्रम और लॉकडाउन लगने से पहले कॉलेज प्रांगण में आयोजित हुए अंतिम कार्यक्रम में उन्होंने ही मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई एवं मेधावी विद्यार्थियों को अपने कर – कमलों से इनाम और अपना आशीर्वाद प्रदान किया ।

आज जिस -जिस को भी अरोड़ा साहब के देहावसान की खबर मिल रही है,वह शख्स सोशल मीडिया पर उनसे जुड़े अपने पल सांझे करके अश्रु भरी आंखों से उन्हें नमन कर रहा है। शहर की विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं ने भी क्षेत्र की तीन पीढ़ियों को अंग्रेजी पढ़ा चुकी इस रूहानी शख्सियत के निधन पर अपनी गहरी शोक – संवेदनाएं व्यक्त की हैं। इस फानी संसार को इस विराट शख्सियत द्वारा अलविदा कहना हम सब के लिए एक बहुत बड़ा शून्य पैदा कर गया है ।समस्त इलाका वासियों की यह परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि वह इस बिछड़ी रूह को अपने चरणों में स्थान दें, परिवार और उनसे जुड़े लोगों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें और उनका आत्मिक आशीर्वाद हमेशा हम सब पर बनाए रखें ।

एक शक्स ऐसा जिया कि हम सबको जीना सिखा गया : नरेश शर्मा
-क्लब के मुख्य सलाहकार व शिक्षाविद् प्रो. आत्मा राम अरोड़ा को वरच्युस परिवार ने दी श्रद्धांजलि…
शहर की अग्रणी संस्था वरच्युस क्लब (इंडिया) के संस्था सदस्यों ने ऑनलाइन बैठक करके क्लब के मुख्य सलाहकार व शिक्षाविद् प्रो. आत्मा राम अरोड़ा के ऑकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया। बैठक को संबोधित करते हुए क्लब के संस्थापक केशव शर्मा ने कहा कि संस्था का नामकरण गुरुदेव ने ही किया था, करीब 35 वर्ष पूर्व उन्होंने शहर के युवाओं को समाजसेवा के प्रति जागरूक किया। क्लब से जुड़े अनेक सदस्य उनके विद्यार्थी रहे हंै। उन्होंने कहा कि बतौर मुख्य सलाहकार क्लब द्वारा आयोजित प्रत्येक प्रकल्प को सफल बनाने के लिए उन्होंने बहुत कार्य किया। प्रबंधक समिति सदस्य परमजीत कोचर व तरसेम गर्ग ने कहा कि दिवंगत अरोड़ा साहिब का समस्त इलाकावासी बहुत सम्मान करते हैं। गुरू नानक कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बेहद सराहनीय कार्य किया। सेवानिवृत्ति के पश्चात् जहां उन्होंने कई विद्यार्थियों को इंग्लिश की नि:शुल्क कोचिंग दी, वहीं वरिष्ठ नागरिक संघ की स्थापना के बाद प्रधान पद पर रहते हुए बुजुर्ग साथियों के जीवन में खुशियां भरने का काम किया। क्लब के वरिष्ठ उप-प्रधान मनोज शर्मा, सचिव हरदेव गोरखी व सोनू बजाज ने भी उनके साथ किए गए कार्यों व उनकी कार्यशैली को याद करते हुए कहा कि अब हम सभी का दायित्व है कि उनके मानवता के प्रति कल्याण हेतु सपनों को साकार करने के कार्य करने होंगे, क्योंकि वो पूरे समाज में अपना अहम प्रेरणादायक किरदार निभाकर विदा हुए हैं, उनके ऑक्समिक निधन पर पूरे इलाके में शोक की लहर है। उत्तर भारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी व उनके पूर्व विद्यार्थी संजीव शाद ने कहा कि कॉलेज के जमाने से ही वो एनएसएस व यूथ क्लब के माध्यम से युवा पीढ़ी का रुख कला, संस्कृति व समाजसेवा की ओर मोड़ देते थे। भाषण, कविता, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में उनके कुशल मार्गदर्शन में कॉलेज, इंटर कॉलेज व यूथ फेस्टिवल में विजय प्राप्ति के बाद मिले सम्मान चिन्ह आज भी हम सबके घरों की दीवारों पर सजे हुए हंै। इलाके में होने वाले कार्यक्रमों में उनकी शिरकत घर में बड़े बुजुर्गों जैसी सम्मानीय होती थी और उनका व्यक्तित्व समाजसेवा के प्रति ऊर्जा व प्रेरणा देता था।

सदस्य परम धुन्ना ने कहा कि क्लब की ओर से उनकी मधुर याद में इंग्लिश स्पोकन क्लासेज नि:शुल्क चलाई जाएगी। पर्यावरण प्रेमी डॉ. बीर चंद गुप्ता ने अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज हमने एक कुशल शिक्षक, फिलॉस्फर, निर्देशक व सबसे परममित्र खो दिया, हालांकि इन दिनों वो सिरसा में थे, लेकिन उनका दिल-दिमाग डबवाली की रूह में बसता था। सोशल मीडिया माध्यम से आज भी डबवाली से जुड़े हुए थे, ऐसी महान पुण्य आत्मा डबवाली की धरोहर है और उनकी याद सदैव बनी रहेगी।

समाजसेवी प्रवीण सिंगला ने कहा कि वर्तमान कोरोना काल के दौर में हम एक-दूसरे के दु:ख में शामिल भी नहीं हो सकते। हमने अपने बहुत से साथियों को खो दिया जिनमें से गुरुदेव एआर अरोड़ा जी भी एक हैं। वो हमारा सशक्त सहारा व जीवन की हर समस्या का समाधान थे और किसी भी समय कोई भी उनसे मिलकर आत्मबल प्राप्त कर सकता था, क्योंकि उनकी बातों से मनोबल बढ़ता था।

क्लब प्रधान नरेश शर्मा ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि एक शक्स ऐसा जिया कि हम सबको जीना सिखा गया। उनकी हर कार्यशैली ही हम सबका मार्गदर्शन करती है। अपनी जीवन रूपी यात्रा में हर मौके पर उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रहती थी, वो रूहानी रूह के मालिक थे। सिमरन, सेवाभाव सदैव मन में रहा। वो दिल से जिये बल्कि विदा होने पर भी जिंदगी का बहुत बड़ा पाठ पढ़ा गए कि जिंदगी एक यात्रा है…बस जो किरदार हमें मिला है वो सेवार्थ हेतु ही है। ऐसे गुरुदेव के जीवन चरित्र से जीवन जीने की कला सीखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वरच्युस परिवार शहरवासियों के साथ मिलकर गुरुदेव की याद को सदैव याद रखेगा। बैठक में मौजूद रहे प्रणव ग्रोवर, सुमित अनेजा, सुमित, जसदीप गिल आदि क्लब सदस्यों ने अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रख अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उल्लेखनीय है कि आर्य समाज, सेवा भारती सहित शहर की धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी उनके निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है।

अरोड़ा साहब के निधन पर tothepointshaad गहरे दुख का इजहार करता है और अपने श्रदा सुमन सहित विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता वो सदैव याद रहेंगे सम्मान के साथ …शत शत नमन ।।

1 thought on “डबवाली क्षेत्र की कला व शिक्षा संस्थाओं के संरक्षक थे स्व. प्रिंसिपल आत्मा राम अरोड़ा”

  1. S S JAURA LG APEX INDIA

    PROF A R ARORA WILL BE REMEMEBERD IN THE YEARS TO COME SUCH A GREAT PERSONALITY A GODLY MAN HAVE EVER WALKED ON THIS PLANET S S JAURA LIFE GOVERNOR APEX INDIA

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