To The Point Shaad

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डबवाली क्षेत्र की कला व शिक्षा संस्थाओं के संरक्षक थे स्व. प्रिंसिपल आत्मा राम अरोड़ा

आदरणीय स्व. आत्माराम जी अरोड़ा अपनी कर्मभूमि किलियांवाली-डबवाली में आयोजित प्रत्येक कार्यक्रम में आमंत्रित फ्रंटलाइन वी वीआईपी थे। उनके किसी कार्यक्रम में उपस्थित होने भर से ही कार्यक्रम का स्तर भव्य हो जाता था। उनका किसी भी कार्यक्रम में आना न केवल आमंत्रित करने वाले की प्रतिष्ठा-शोभा को बढ़ाता था बल्कि स्वर्गीय अरोड़ा ही अपने …

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युद्ध…आदमी इक हादसा होने से डरता है….

शंखनाद हो चुका है पुराने जमाने मे युद्ध सूरज ढलने के साथ रुक जाते थे आमने सामने होते थे सीधे होते थे दुश्मन सामने होता था यानी युद्ध के नियम होते थे लेकिन वर्तमान दौर में युद्ध  बदल गए है दुश्मन छुप कर वार करता है या किसी का कन्धा होता है निशाने पर कोई …

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वक्त का मिजाज एक सा नही होता…

यह सही है कि आने वाले वक्त की सूरत अनजान होती है, लेकिन हमारे अपने खयाल उस वक्त को शक्ल दे रहे होते हैं। हम भविष्य के प्रति इतना सोचते हैं कि पूरी एक कहानी ही गढ़ लेते हैं। आने वाले वक्त में वैसा होगा या नहीं, पता नहीं, पर भविष्य में झांकने की हमारी तैयारी ऐसी …

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तिनका….

(मेरे एकल नाटक तिनका का पहला डायलॉग…) बस ये ही इक बात खतरनाक ….हर कोई चाहता है कोई और लडे …..बंदूक हमारी और कंधा किसी कातो फिरलड़ाई…..अब और किस लिएकिसके लियेक्योकिमै और नहीं चाहता लड़नाऔर बोलनाबसमै मुर्दा होगया हूँऔर शामिल हूँ भेड़ो की भीड़ मेंकल अंतिम विदाई हैतुम भी आना और बस सिर्फ रोनाऔर कहना …

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चंडीगढ़ की एक रात…

चंडीगढ़ की रात…आज रात के भोजन के बादसड़क किनारे टहलते हुएपास से गुजरती तेज गाड़िया की तेज लाइटचोंक पे लाल बत्तीतेज चलती सब की जिंदगी को शायदकम ही बर्दास्त होती हैऔरहरी बत्तीसब को पसन्दफिर रफ़्तार और हॉर्न की पो पोफुटपाथ पे रुके हुए मेरे पैरलाल और रंग में उलझ गएफिर सोचा होटल तो अपनी जगह …

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अकेला न समझ मुझे…

अकेला ना समझ तू मुझेमेरे साथ इक आत्म विशवास चलता हैआम आदमी हूँइसलिए मेरा आंधियो में भी चिराग जलता हैतेरी सल्तनत तो पलभर का तमाशा हैमेरा तो धरती पे मित्रो के साथ हर रोज दरवार लगता है डर नहीं है मुझे ….मैंबेखोफ हूँसेहरा नहीं है सर पे …..मेरेबस इक कफन सजता हैरोयेगे नहीं करेगे बातेमरने …

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गज फुट इंच….

हर कोई घर से निकलताकुछ खरीदनेया कुछबेचनेयाफिर नगदयाउधारये हैबाजार…….. कुछ ऐसे भी हैन लाभन हानिना हिसाबन किताबऔर सिर्फ खाली हाथउनके लिएसिर्फ इक चक्कर हैबाज़ारऔर शाम को घर आ कर सोचते हैधरती गोल हैबाकि सब के लिए धरतीचपटी तिकोनीगज फुट इंचऔरब्याज है जो दिन और रातको भीघड़ी की सुईके साथचलता रहता हैफिर भीहर कोईहर वक्तहैखाली हाथऔरबाज़ार …

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