To The Point Shaad

Shaad, Pen

वक्त का मिजाज एक सा नही होता…

यह सही है कि आने वाले वक्त की सूरत अनजान होती है, लेकिन हमारे अपने खयाल उस वक्त को शक्ल दे रहे होते हैं। हम भविष्य के प्रति इतना सोचते हैं कि पूरी एक कहानी ही गढ़ लेते हैं। आने वाले वक्त में वैसा होगा या नहीं, पता नहीं, पर भविष्य में झांकने की हमारी तैयारी ऐसी …

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तिनका….

(मेरे एकल नाटक तिनका का पहला डायलॉग…) बस ये ही इक बात खतरनाक ….हर कोई चाहता है कोई और लडे …..बंदूक हमारी और कंधा किसी कातो फिरलड़ाई…..अब और किस लिएकिसके लियेक्योकिमै और नहीं चाहता लड़नाऔर बोलनाबसमै मुर्दा होगया हूँऔर शामिल हूँ भेड़ो की भीड़ मेंकल अंतिम विदाई हैतुम भी आना और बस सिर्फ रोनाऔर कहना …

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चंडीगढ़ की एक रात…

चंडीगढ़ की रात…आज रात के भोजन के बादसड़क किनारे टहलते हुएपास से गुजरती तेज गाड़िया की तेज लाइटचोंक पे लाल बत्तीतेज चलती सब की जिंदगी को शायदकम ही बर्दास्त होती हैऔरहरी बत्तीसब को पसन्दफिर रफ़्तार और हॉर्न की पो पोफुटपाथ पे रुके हुए मेरे पैरलाल और रंग में उलझ गएफिर सोचा होटल तो अपनी जगह …

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अकेला न समझ मुझे…

अकेला ना समझ तू मुझेमेरे साथ इक आत्म विशवास चलता हैआम आदमी हूँइसलिए मेरा आंधियो में भी चिराग जलता हैतेरी सल्तनत तो पलभर का तमाशा हैमेरा तो धरती पे मित्रो के साथ हर रोज दरवार लगता है डर नहीं है मुझे ….मैंबेखोफ हूँसेहरा नहीं है सर पे …..मेरेबस इक कफन सजता हैरोयेगे नहीं करेगे बातेमरने …

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गज फुट इंच….

हर कोई घर से निकलताकुछ खरीदनेया कुछबेचनेयाफिर नगदयाउधारये हैबाजार…….. कुछ ऐसे भी हैन लाभन हानिना हिसाबन किताबऔर सिर्फ खाली हाथउनके लिएसिर्फ इक चक्कर हैबाज़ारऔर शाम को घर आ कर सोचते हैधरती गोल हैबाकि सब के लिए धरतीचपटी तिकोनीगज फुट इंचऔरब्याज है जो दिन और रातको भीघड़ी की सुईके साथचलता रहता हैफिर भीहर कोईहर वक्तहैखाली हाथऔरबाज़ार …

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कुछ चेहरे लेकर घर से निकलता हूँ…

कुछ चेहरे लेकरघर से निकलता हूँतुम्हे जो अच्छा लगता हैवो ही रंग निखरता है मेरे चहेरे का खुद का चहेरा भी नही दिखता मुझेआइना अक्सर देखता है चहेरा मेरा मेरे चेहरे की आदत हो गई हैतुम्हारी आँखों की तरह बदलने की चेहरों की भीड़ में कितने चहेरे हैऔर भीड़ का कोई अपना चहेरा नही हँसते …

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