To The Point Shaad

Shaad, Pen

कुछ चहेरे लेकर घर से निकलता हूँ…

कुछ चहेरे लेकरघर से निकलता हूँतुम्हे जो अच्छा लगता हैवो ही रंग निखरता है मेरे चहेरे का खुद का चहेरा भी नही दिखता मुझेआइना अक्सर देखता है चहेरा मेरा मेरे चहेरे की आदत हो गई हैतुम्हारी आँखों की तरह बदलने की चहेरो की भीड़ में कितने चहेरे हैऔर भीड़ का कोई अपना चहेरा नही हँसते …

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हास्य योग…मिटाए रोग..

बस हमे तो हँसने का बहाना चाहिए अगर खुद में हँसी आये तो खुल कर हँसना चाहिए खुला निमंत्रण……….. हँसना जरूरी है ……मना तो बिलकुल भी नही ……तुम मेरे पे खुल के खिलखलाकर हँस सकते होअंदर ही अंदर क्यों हसंते हो ….शायद याद भी नही कब खुल के हँसे थे मिल करअक्सर हमारे जीवन में …

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कविता दिल से……

वो अकेला जा रहा था उसके पास कुछ भी नही था बस कुछ किस्से  कुछ कहानियाँ थी और खाली हाथ सुनसान सड़क पे उस ने  बोला था इक दिन मुझ से और कितनी भी बचत कर लो आखिर बचता भी क्या है ढेर भर राख कुछ हड्डिया पानी में बहाने के लिए और चार दिन …

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