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गजल सम्राट जगजीत सिंह..यादे ख्याल ख्बाव

संवेदनाओं को सुरों में पिरोने वाले, महान मधुर संगीतकार और गजल सम्राट पद्मविभूषित श्री जगजीत सिंह जी जीवन के प्रति उनकी सवेदनशील गायन कला और गीत “चिट्ठी ना कोई संदेश, होठों से छू लो तुम, तुमको देखा तो ये खयाल आया, तुम इतना ज्यो मुस्कुरा रहे हो” ऐसी गजलों से गीतों की एक नई तासीर से दुनिया को परिचित करनेवाले गजल गायक पद्मभूषण जगजीत सिंह जी सदैव अमर रहेगे उनकी गजलो व गीतों में हम जीवन दर्शन कर सकते है क्योंकि
उनकी आवाज में शहद सी मिठास थी, जिससे गीत-ग़ज़ल की आत्मा जग जाती थी…


जगजीत सिंह (८ फ़रवरी १९४१ – १० अक्टूबर २०११) का नाम बेहद लोकप्रिय ग़ज़ल गायकों में शुमार हैं। उनका संगीत अंत्यंत मधुर है और उनकी आवाज़ संगीत के साथ खूबसूरती से घुल-मिल जाती है। खालिस उर्दू जानने वालों की मिल्कियत समझी जाने वाली, नवाबों-रक्कासाओं की दुनिया में झनकती और शायरों की महफ़िलों में वाह-वाह की दाद पर इतराती ग़ज़लों को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को पहले पहल दिया जाना हो तो जगजीत सिंह का ही नाम ज़ुबां पर आता है। उनकी ग़ज़लों ने न सिर्फ़ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इज़ाफ़ा किया बल्कि ग़ालिब, मीर, मजाज़, जोश और फ़िराक़ जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया।

जगजीत सिंह को सन २००३ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। फरवरी २०१४ में आपके सम्मान व स्मृति में दो डाक टिकट भी जारी किए गए।[1]
स्व. जगजीत सिंह जी जयंती पर सादर नमन !

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