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विद्यार्थी जीवन और आत्मविश्वास

आत्म विश्वास कैसे बढ़ाएं
विद्यार्थी जीवन में आत्मविश्वास का बड़ा महत्व है। ये अभ्यास से ही संभव है अभ्यास एक तरह का संघर्ष ही है। शिक्षा प्राप्ति के लिए अभ्यास नितान्त आवश्यक है। सफलता के लिए कड़ी मेहनत और कड़े अभ्यास के अलावा दूसरा और कोई विकल्प नहीं। ये अभ्यास बाधाओं और चुनौतियों से भरपूर होगा। देखना यह है कि आप इसे कैसे लेते हैं।सफलता के लिए धैर्य, लग्न और इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। नियमित अभ्यास व्यक्ति को पूर्ण बनाता है। कहा भी जाता है Practice makes a man Perfect. अभ्यास ही विद्यार्थी को उसके स्किल्स और अध्ययन में दक्ष बना सकता है। स्किल्स में निपुणता तो केवल अभ्यास से ही संभव है।
अभ्यास को सरल भाषा में बार बार दोहराना कह सकते हैं जब तक कि सारी कमियां या त्रुटियां दूर न हो जाएं। तभी विद्यार्थी कौशल संपन्न हो सकता है, जब वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ असफलता को भी स्वीकार करते हुए, रणनीति तैयार करके योजनाबद्ध तरीके से अपने आप को उस भट्ठी में नहीं झोंक देता जिस लक्ष्य को वह पाना चाहता है। जैसे सोना आग में जल कर ही शुद्ध और बेशकीमती होता है।
एक आदमी 21साल की उम्र में व्यापार में नाकामयाब हो गया,22 साल की उम्र में चुनाव हार गया,24 में फिर व्यापार में फिर असफलता पाई, 26 साल की उम्र में पत्नी का देहांत हो गया,27 साल की उम्र में वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठा, 34 की उम्र में वह एक कांग्रेस का चुनाव हार गया, और 45 में सैनेट का, और 47 साल की उम्र में वह उपराष्ट्रपति बनने में असफल रहा, 49 की आयु में सैनेट के एक और चुनाव में उसे करारी हार मिली, और वही आदमी 52 साल की उम्र में अमरीका का राष्ट्रपति चुना गया। जानते हैं वह आदमी कौन था, वह था, अब्राहम लिंकन, जिसे भाषण देना नहीं आता था तो जंगलों में पेड़ों के सामने जा कर बोल बोल कर अपने व्याख्यान की तैयारी करता था,यही अभ्यास एक दिन उसे उस मुकाम तक ले गया जहां वह पहुंचना चाहता था।
आप जिस भी विधा में निपुणता या संपूर्णता पाना चाहते हैं उसके लिए जरूरी है तपस्या। तपस्या,रियाज़, अभ्यास व दोहराई एक दूसरे के ही पर्यायवाची हैं। ढेरों उपलब्धियां और बेहतर प्रदर्शन के लिए अभ्यास की ही आवश्यकता पड़ती है। फिर क्षेत्र चाहे वो शिक्षा, योग,संगीत,खेल, नृत्य,गायन,कराटे, अभिनय,तैराकी,तीर अंदाज़ी, कोई स्पीकिंग कोर्स, डेकलेमेशन हो या फिर कोई और, प्रत्येक में निपुणता के लिए प्रैक्टिस ही मुकम्मल टूल है।
करत करत अभ्यास ते जड़ मति होत सुजान, रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निशान।(कबीर जी)भाव बार बार अभ्यास करने से तो जड़ मति अर्थात मूर्ख भी सुजान भाव ज्ञानी हो जाता है।
प्यारे विद्यार्थियों आज कल कोविड के कारण लाकडाऊन के साथ साथ ग्रीष्मावकाश भी चल रहा है और स्कूल भी लंबे समय से बंद पड़े हैं।ये एक चुनौती है। अपनी सोच साकारात्मक रखें ।सर्वप्रथम आप अपनी प्राथमिकताएं तय करें और इसे सुअवसर में बदलें। ये एक ऐसा सुअवसर है कि आप किसी भी क्षेत्र में जिस में आप की रुचि है या शौक है, उस विधा में प्रैक्टिस करके निपुणता हासिल करें और इस निपुणता और कार्य कुशलता से आत्मविश्वास बढ़ेगा।इसी निपुणता से आप शोहरत कमा सकते हैं। ख्याति पा सकते हैं।विद्वान व महान बन सकते हैं।
समय को नष्ट मत करिए, सुना है जो लोग समय को नष्ट करते हैं उन्हें एक दिन समय नष्ट कर देता है।
इसमें आप अच्छी आदतों का निर्माण कर सकते हैं। मोटिवेशनल स्पीकरस को सुने। गूगल से विषय उपयोगी सामग्री जुटाएं। आप समय प्रबंधन सीख सकते हैं। लेखक बन सकते हैं।इस तरह आप अपनी प्रतिभा और क्षमता को अभ्यास के द्वारा बढ़ा सकते हैं।
थामस एडीसन बिजली का बल्ब बनाने से पहले लगभग दस हजार बार असफल हुए थे। परंतु उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा था। बीथोवैन जब युवा थे तो उन्हें यह कह कर कंसरट से निकाल दिया गया था कि उनमें प्रतिभा नहीं है, परंतु उन्होंने संसार को संगीत की वो उत्तम रचनाएं दी जो संगीत जगत में एक मिसाल है तो हम सब भी इस समय का सदुपयोग करते हुए अपने अभ्यास के लिए नये क्षेत्र तलाशें।
वेदप्रकाश भारती
एन पी एस डबवाली

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